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शौक या मौत? तंबाकू आपको कूल नहीं, अपनी लत का गुलाम बनाता है!

आज 31 मई है—यानी विश्व तंबाकू निषेध दिवस। आज का दिन सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक चेतावनी है उस धीमे जहर के खिलाफ जो हमारे समाज, विशेषकर हमारी युवा पीढ़ी को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है।

हाल ही में बरेली के प्रतिष्ठित हिंदी समाचार पत्र ‘अमृत विचार’ (Amrit vishar.jpg) में छपे एक विशेष साक्षात्कार में रोहिलखंड कैंसर इंस्टीट्यूट (RCI), बरेली के निदेशक एवं सीनियर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अर्जुन अग्रवाल ने तंबाकू, गुटका, सिगरेट और आजकल युवाओं में तेजी से बढ़ रहे वैपिंग (Vaping) व ई-सिगरेट के चलन पर कई चौंकाने वाले और आंखें खोल देने वाले खुलासे किए हैं।

आइए इस ब्लॉग के माध्यम से जानते हैं कि जिसे युवा अक्सर ‘टैलेंट’ या ‘कूल दिखने का जरिया’ समझते हैं, वह असल में मौत का सीधा रास्ता कैसे है।

🚨 तंबाकू: स्वाद नहीं, जीवन को निगलती बीमारी

अस्पतालों में हर दिन ऐसे अनगिनत मरीज पहुंचते हैं जिनकी जिंदगी की शुरुआत एक बेहद छोटी और आम आदत से हुई थी—चाहे वह खैनी हो, बीड़ी, सिगरेट, पान मसाला या फिर आजकल का आधुनिक ट्रेंड यानी ई-सिगरेट (E-Cigarette)

शुरुआत में यह सिर्फ एक ‘शौक’ या दोस्तों के बीच मनोरंजन के लिए होता है, लेकिन धीरे-धीरे यह रोजमर्रा की आदत बन जाती है। डॉ. अर्जुन अग्रवाल बताते हैं कि तंबाकू सिर्फ उस व्यक्ति को ही नहीं मारता जो इसका सेवन करता है, बल्कि उसका पूरा परिवार इसके साथ तबाह हो जाता है। एक बच्चा अपने पिता का साया खो देता है, तो एक बूढ़े माता-पिता अपने जवान बेटे को अपनी आँखों के सामने दम तोड़ते हुए देखते हैं।

📊 आंकड़े जो आपको डरा देंगे (The Harsh Reality)

Amrit vishar.jpg में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, तंबाकू का जाल हमारी आने वाली पीढ़ी को किस कदर जकड़ चुका है, इसे इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • 4 करोड़ बच्चे तंबाकू के जाल में: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में 13 से 15 वर्ष की आयु के लगभग 4 करोड़ बच्चे किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं।

  • 1.5 करोड़ किशोर ई-सिगरेट के लती: युवाओं को आकर्षित करने के लिए कंपनियाँ कैंडी या फ्रूट फ्लेवर वाली ई-सिगरेट बेच रही हैं। भारत में ही लगभग 1.5 करोड़ किशोर इसकी चपेट में आ चुके हैं।

  • 80 लाख मौतें हर साल: दुनिया में हर साल 80 लाख से अधिक लोग अकाल मौत का शिकार होते हैं। इनमें से 12 लाख वे मासूम लोग हैं, जो खुद धूम्रपान नहीं करते बल्कि ‘पैसिव स्मोकिंग’ (Passive Smoking) यानी दूसरों के धुएं के संपर्क में आने से अपनी जान गंवाते हैं।

  • अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान: तंबाकू के कारण भारत को हर साल करीब 1.77 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

❓ तंबाकू और कैंसर से जुड़े कुछ बड़े सवाल (डॉ. अर्जुन अग्रवाल से सीधी बातचीत)

1. क्या तंबाकू सच में कैंसर का सबसे बड़ा कारण है?

डॉ. अर्जुन अग्रवाल: बिल्कुल, इसमें कोई संदेह नहीं है। तंबाकू का सेवन मुंह, जीभ, गला, फेफड़े, भोजन नली, पेट, अग्न्याशय (Pancreas), किडनी, मत्राशय और गर्भाशय ग्रीवा सहित कई तरह के कैंसर का जोखिम अत्यधिक बढ़ा देता है। हमारे देश और विशेषकर उत्तर प्रदेश में गुटका, खैनी, जर्दा और पान मसाला का बढ़ता सेवन एक बेहद गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।

2. क्या गुटका और खैनी, सिगरेट से कम खतरनाक हैं?

डॉ. अर्जुन अग्रवाल: यह समाज में फैला सबसे बड़ा भ्रम है। चबाने वाला तंबाकू सीधे मुंह की अंदरूनी परत (Mucosa) के संपर्क में रहता है। इससे मुंह के अंदर सफेद या लाल रंग के दाग-धब्बे पड़ने लगते हैं, मुंह का खुलना कम हो जाता है (Submucous Fibrosis), और लगातार जलन होती है। आगे चलकर यही लक्षण मुंह के कैंसर में बदल जाते हैं।

3. मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो इसे भूलकर भी नजरअंदाज न करें:

  • मुंह में कोई ऐसा छाला जो तीन सप्ताह से अधिक समय में भी ठीक न हो।

  • मुंह के भीतर सफेद या लाल रंग के दाग-धब्बे पड़ना।

  • गाल या जीभ पर किसी तरह की गांठ महसूस होना।

  • मुंह खोलने, चबाने या कुछ भी निगलने में परेशानी होना।

  • आवाज में अचानक बदलाव आना या गर्दन में कोई गांठ उभरना।

4. क्या आजकल युवाओं में बढ़ रहा वैपिंग या ई-सिगरेट का चलन एक सुरक्षित विकल्प है?

डॉ. अर्जुन अग्रवाल: बिल्कुल नहीं! तंबाकू कंपनियाँ नए उत्पादों को आकर्षक फ्लेवर, आधुनिक पैकेजिंग और आक्रामक ऑनलाइन प्रमोशन के जरिए पेश कर विशेष रूप से युवाओं को टारगेट कर रही हैं। इसमें मौजूद निकोटिन अत्यधिक एडिक्टिव (लत लगाने वाला) होता है। इसे ‘हानिरहित फैशन’ समझना बहुत बड़ी भूल और बेहद खतरनाक है।

5. क्या सालों से तंबाकू खा रहा व्यक्ति यदि इसे छोड़ता है, तो कोई फायदा होता है?

डॉ. अर्जुन अग्रवाल: शत-प्रतिशत फायदा होता है! तंबाकू छोड़ने के तुरंत बाद शरीर में रिकवरी शुरू हो जाती है। समय के साथ पुरानी खांसी ठीक होती है, सांस लेने में आसानी होती है, स्वाद और सूंघने का स्तर बढ़ता है। हृदय और फेफड़ों का स्वास्थ्य बेहतर होने से भविष्य में होने वाली जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना कम हो जाता है।

🎯 आज ही एक दृढ़ संकल्प लें

“अपने लिए न सही, अपने उस परिवार के लिए जो आपसे बेहद प्यार करता है… तंबाकू को हमेशा के लिए छोड़ दें!”डॉ. अर्जुन अग्रवाल (सीनियर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, RCI बरेली)

तंबाकू छोड़ना मुश्किल जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। आज इस ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ पर खुद से और अपने परिवार से एक वादा करें। यदि आपके आस-पास कोई इस लत से जूझ रहा है, तो उन्हें डांटने के बजाय चिकित्सीय और मानसिक मदद लेने के लिए प्रेरित करें।

याद रखें: धुआं उड़ाने में नहीं, जिंदगी बचाने में समझदारी है।

यह ब्लॉग ‘अमृत विचार’ (Amrit vishar.jpg) समाचार पत्र में प्रकाशित सामग्री के सहयोग से जनहित में जारी किया गया है।

https://epaper.amritvichar.com/view/22496/amrit-vichar-bareilly-city-epaper-31-may-2026